गर्मी के मौसम ने दस्तक दे दी है लेकिन क्षेत्र के सरकारी स्कूलों व गांवों में लगे इंडिया मार्का हैंडपंप की हालत खस्ता है। कई तो ऐसे हो गए हैं जो खुद प्यासे हैं। खराब पड़े हैंडपंप की मार सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों पर ही पड़ने वाली है। क्योंकि उनको प्यास बुझाने के लिए शुद्ध पानी यहीं से मिल पाता था। अगर यही न रहा तो बच्चों को दर-दर भटकना पड़ सकता है। इतना ही नहीं मध्यान्ह भोजन बनाने वालों के सामने भी समस्या खड़ी हो गई है। परिषदीय स्कूलों में सरकार ने हैंडपंप तो लगवा दिया था। मंशा थी कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को प्यास बुझाने के लिए स्कूल से बाहर न जाना पड़े। साथ ही मध्यान्ह भोजन बनाने में भी शुद्ध पानी का उपयोग हो सके। लेकिन समय बीतता गया तो रख रखाव के अभाव में हैंडपंपों की हालत बिगड़ती चली गई। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों एवं प्रधानाध्यापकों ने इसकी शिकायत ब्लॉक स्तर नहीं की। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते खैर खबर लेने वाला कोई भी स्कूलों तक नहीं पहुंचा। सिर्फ तहसील सदर को ही ले लें तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। विकास खंड लखीमपुर के लोहिया समग्र गांव जमुनहा के प्रथमिक विद्यालय में लगा हैंडपंप महीनों से पीला पानी दे रहा हैं। सर्दी के मौसम में तो काम चल गया लेकिन अब मुश्किल होगी। इसी तरह राजेपुर गांव के प्राथमिक स्कूल का हैंडपंप भी मुंह चिढ़ा रहा हैं। साथ ही चिंतापुर बिझौली रमुआपुर की बाजार में लगे हैंडपम्प पर पानी निकास न होने के कारण गंदा पानी भरा रहता है समेत कई गांवों के हैंडपंप भी ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा रहे हैं। हालात ये हैं कि सरकारी स्कूलों के बच्चे इस घर से उस घर जाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। वहीं ग्रामीण भी दूर दराज से पानी लाकर जरूरी काम पूरा कर रहे हैं। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि कई बार ब्लॉक व ग्राम प्रधान सहित जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या से रूबरू कराया गया है। मगर कोई अधिकारी देखने तक नहीं आता है वहीं ग्रामीण भी पानी की किल्लत से आक्रोशित हैं।
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