छात्र नहीं मिल रहे तो प्रदेश के बीएड कॉलेज दे रहे तरह-तरह के ऑफर, किस्तों में फीस और डिस्काउंट अलग से, खाली रह गई 75 प्रतिशत सीटें
लखनऊ: किस्तों में फीस जमा करें और डिस्काउंट भी । ऐसे ऑफर प्रदेश के वे बीएड कॉलेज दे रहे हैं, जो कभी सरकार की तय फीस से ज्यादा वसूली करते थे । अव दाखिलों के लिए छात्र नहीं मिल रहे। ऐसे में उन्हें आकर्षित करने के लिए स्कॉलरशिप और कई तरह की छूट सहित तरह-तरह तरह के ऑफर दिए जा रहे हैं। इसके लिए वे विज्ञापन भी दे रहे हैं।
खाली रह गई 75 प्रतिशत सीटें: इस साल वीएड के दाखिलों का जिम्मा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को दिया गया था। कुल 2,45,220 सीटों के लिए चार चरणों की काउंसलिंग के साथ पूल काउंसिलिंग भी हो चुकी है। इसके बावजूद 61 हजार यानी 25% सीटें ही भर पाई हैं। अब कॉलेजों को सीधे अपने स्तर से काउंसलिंग कर दाखिले के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके लिए पहले 2 से 11 नवंबर तक की तारीख दी गई थी। इसके बाद भी दाखिला लेने वाले छात्र न मिलने पर कॉलेजों की मांग पर तारीख 20 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।
कैसे-कैसे ऑफर
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, कॉलेज छात्रों को तरह-तरह के ऑफर दे रहे हैं। कानपुर के एक कॉलेज ने विज्ञापन छपवाया है। इसमें प्रति सेमेस्टर 12,500 की चार किस्तों में फीस जमा करने का ऑफर दिया है। यानी दो साल में कुल 150 हजार फीस पर कॉलेज दाखिला दे रहा है, जबकि सरकार की ओर से निजी कॉलेजों के लिए तय फीस पहले साल 51,250 और दूसरे साल 30 हजार रुपये है। इस तरह यह फीस 81,250 रुपये होती है।
अलीगढ़ के एक कॉलेज ने स्कॉलरशिप और एससी/एसटी छात्रों को विशेष छूट का ऑफर दिया है। उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि छात्र नहीं मिल रहे। ऐसे में तय फीस से कम पर भी कॉलेज तैयार हो जा रहे हैं। कॉलेज में शिक्षकों और अन्य संसाधनों पर खर्च तो हो ही रहा है। कुछ छात्र मिल जाते हैं तो खर्च निकालने के लिए कुछ तो व्यवस्था हो जाएगी।
क्यों आई यह नौबत ?
बीएड से युवाओं का अचानक इतना मोह भंग होने की कई वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह तो यह है कि अब बीएड वाले बेसिक शिक्षक नहीं बन सकते। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया है। इस आदेश के अनुसार सिर्फ बीटीसी ही बेसिक शिक्षक बनने की अर्हता है।
जब यह आदेश आया उस समय बीएड और बीटीसी दोनों की दाखिला प्रक्रिया चल रही थी। आदेश जाने पर जो बीएड में दाखिला लेने जा रहे थे, वे भी बीटीसी में शिफ्ट हो गए। दूसरी वजह यह है कि अल्पसंख्यक कॉलेज 50% सीटों पर कभी भी दाखिला ले सकते थे।
अब विश्वविद्यालयों में छात्रों का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। कई विश्वविद्यालयों ने सितंबर तक ही रजिस्ट्रेशन किया। इस वजह से भी सीधे दाखिला लेने वाले छात्र नहीं मिल रहे।
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